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दिल्‍ली : रमजान के महीने में जामा मस्जिद के पास लगता है ‘पकवानों का मेला’

नई दिल्ली: दिल्ली आकर पुरानी दिल्ली के स्वादिष्ट व्यंजन न चखे तो क्या किया. खाने के मामले में दिल्ली की जान कही जाने वाली इस जगह में हर त्योहार जोर-शोर से मनाया जाता है. वैसे तो, दिल्ली में सभी जगह पर त्योहार धूम-धाम से मनाया जाता है. पर जामा मस्जिद के आस-पास रमजान का महीना देखने लायक होता है. मेले की तरह सजी हुई सड़कें ना सिर्फ खाने की खुशबू से महकी हुईं होती हैं बल्कि गजलों से माहौल रंग जाता है. जगह त्योहार का जश्न मनाया जाता है, लेकिन पुरानी दिल्ली में रमजान के दौरान परोसे जाने वाला खाना चखने योग्य होता है. देखते ही मुंह में पानी ला देने वाले व्यंजन सभी को अपनी ओर आकर्षित करते हैं. तो चलिए जानते हैं रमजान के पाक महीने में पुरानी दिल्‍ली के मशहूर जामा मस्जिद इलाके की कुछ दुकानों और पकवानों के बारे में, जिसको पढ़ने के बाद आपके मुंह में पानी आ जाएगा…

लालू और कुरेशी के सुतली कबाब

जामा मस्जिद के बाहर, उर्दू बाज़ार रोड के नाम से जानी जाने वाली लेन कबाब की दुकानों से भरी हैं. वैसे तो, यहां हर 10 मीटर की दूरी पर आपको एक कबाब की दुकान नज़र आएगी, लेकिन लालू और कुरेशी के कबाब खाने में सबसे अच्छे हैं. इनकी ख़ास बात यह है कि ये पतले और रस से भरे होने के अलावा इतने मुलायम हैं कि मुंह में रखते ही घुल जाते हैं.

हाजी मोहम्मद हुसैन

यहां जाने के लिए आपको गेट नं- 1 के सामने उलटे हाथ पर मुड़ना पड़ेगा. हाजी मोहम्मद का फ्राई चिकन सभी का फेवरिट है. बेसन और मसालों के मिश्रण को चिकन पर लगाया जाता है, जिसे बाद में फ्राई किया जाता है. इसके अलावा इसे लाल चटनी के साथ परोसा जाता है, जो खाने में काफी तीखी होती है. रमज़ान के दौरान कीमा गोली (मीट की बॉल्स) को प्याज़ के साथ सर्व किया जाता है. अगर आप भी इन सभी का ज़ायका लेना चाहते हैं, तो जामा मस्जिद जाकर ले सकते हैं.

कूल प्‍वाइंट

खाने के साथ कुछ मीठा न हो ऐसा कैसे हो सकता है. जामा मस्जिद आए और कूल पॉइंट की मटका फिरनी और शाही टुकड़ा न ट्राई किया, तो क्या किया. ख़ासतौर से यहां का शाही टुकड़ा इतना लज़ीज है कि आप इसे एक बार नहीं, बल्कि बार-बार खाना पसंद करेंगे. ब्रेड को फ्राई करके उसके ऊपर देसी घी और खोया डालकर इसे परोसा जाता है. चेहरे पर मुसकान ला देने वाला शाही टुकड़ा हर किसी का फेवरिट है.

बिलाल की निहारी
मीट के दिवाने यहां आकर मोटी रोटी के साथ निहारी की एक प्लेट चखना ट्राई कर सकते हैं. मीट को घंटो तक हल्की आंच पर पकाया जाता है. इस दौरान इसमें ग्रेवी बनाने के लिए मसाले, हरी मिर्च और नींबू का रस डाला जाता है. मुंह में रखते ही घुल जाने वाले इस मीट को लोग बड़े चाव से खाना पसंद करते हैं.

असलम चिकन कॉर्नर
आपकी फूड वॉक का अगला ठिकाना असलम चिकन कॉर्नर है. यहां आपको मक्खन में तैरता टेस्टी चिकन टिक्का मिलेगा. इंडियन मसालों और दही को मिलाकर मोटे-मोटे चिकन के टुकड़ों पर मसाला लगाया जाता है, जिन्हें लंबी सिलाई में डालकर ग्रिल किया जाता है. चिकन टिक्का को सजाने और उसका टेस्ट बढ़ाने के लिए उसमें ऊपर से पिघला हुआ मक्खन डाला जाता है, जिसे खाते ही आपको जन्नत का अहसास पहुंचेगा.

नवाब कुरैशी का प्यार मोहब्बत मज़ा
गली पार करते ही आपको हल्के गुलाबी रंग का पेय पदार्थ, ‘प्यार मोहब्बत मज़ा’ पर लोगों की भीड़ दिखाई देगी. यह मूल रूप से उत्तर प्रेदश का है. ताज़गी देने वाला यह पेय पदार्थ तरबूज, दूध और रूहअवज़ा को मिलाकर बनाया गया है, जिसे पीते ही आप फ्रेश हो जाएंगे. इसकी खुशबूदार और इनमें आने वाले तरबूज के टुकड़े लोगों के बीच फेमस होने का मुख्य कारण है.

पहाड़ी इमली के नज़दीक गुड़ का शरबत
कहते हैं कि खाने के बाद गुड़ पाचन क्रिया के लिए काफी अच्छा होता है. अगर आपको यहां का खाना थोड़ा भी हेवी लगे, तो गुड़ का शरबत ट्राई कर सकते हैं. जामा मस्जिद आकर हमें यह पता चला कि अखिल अहमद का गुड़ का शरबत काफी मशहूर है. तांबे के बर्तन में शरबत लिए वह एक लकड़ी के स्टूल पर बैठते हैं. उनके पास न तो कोई दुकान है और न ही सर पर कोई छत. फिर भी 1947 में 10 पैसे के बिकने वाले इस गुड़ के शरबत को लोग पीना पसंद करते हैं. इसे बनाने के लिए ठंडे पानी में गुड़ को डालकर रखा जाता है, जिसे बाद में छानकर सर्व किया जाता है. अखिल का कहना है कि ताबे के पर्तन में जो पीतल का चम्मच है, वह यह दुकान शुरू होने से भी पहले का है.

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