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निर्जला एकादशी 2018: मुहूर्त और खास बातें-

हिन्दू शास्त्रों के अनुसार एकादशी का व्रत-उपवास रखने से भगवान श्रीहरि विष्णु अपने भक्तों से प्रसन्न होकर उन पर अपनी कृपा बनाए रखते हैं. एकादशी 1 माह में दो बार आती है- एक कृष्ण पक्ष में और दूसरी शुक्ल पक्ष में. हिन्दू पंचांग के अनुसार महीने की प्रत्येक 11वीं तिथि को एकादशी व्रत का विधान होता है. इस महीने एकादशी शनिवार 23 जून को होगी.

हिन्दू धर्म के अनुसार एकादशी व्रत करने की इच्छा रखने वाले मनुष्य को दशमी के दिन से ही कुछ अनिवार्य नियमों का पालन करके अगले दिन (द्वादशी) प्रात:काल सूर्योदय के पश्चात ही एकादशी व्रत पूरा करके ही भोजन ग्रहण करना चाहिए. यह व्रत सर्व-सुख और मोक्ष देने वाला माना जाता है.

एकादशी व्रत के नियम
एकादशी व्रत में ताजा फल, सूखे मेवे, सब्जी एवं दूध से बनी मिठाई ही इस दिन खाई जाती हैं.  कुछ राज्यों में केवल साबुदाना, मूंगफली एवं आलू का ही भोजन इस दिन किया जाता है. कई लोग इस दिन पानी भी नहीं पीते, इसलिए इसे निर्जला एकादशी भी कहा जाता है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है. कुछ श्रद्धालू रात में एकादशी व्रत की कथा, कहानी एवं मंत्र भी पढ़ते हैं.एकादशी के अगले दिन को द्वादशी कहा जाता है. यह दशमी या अन्य दिनों की तरह आम दिन होता है, जिसमें सुबह जल्दी नहाकर, दीये जलाकर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है साथ ही दशमी के दिन बनाया गया भोजन खाकर व्रत को पूरा किया जाता है.

एकादशी का महत्व
हिन्दू पुराणों के अनुसार एकादशी को ‘हरी वसर’ और‘हरी दिन’ के नाम से भी जाना जाता है. एकादशी वैष्णव एवं गैर-वैष्णव दोनों समुदाय द्वारा मनाया जाती है. एकादशी के महत्व को स्कन्द पुराण एवं पद्म पुराण में भी बताया गया है. जो भी भक्त इस दिन व्रत रखते हैं वो इस दिन गेहूं, मसाले और सब्जियां नहीं खा सकते. श्रद्धालू इस व्रत की तैयारी एकादशी से एक दिन पहले दशमी से ही प्रारंभ कर देते हैं और सुबह जल्दी उठकर पवित्र जल से स्नान करते हैं, इसके साथ ही पूरे दिन बिना नमक का खाना खाते हैं.

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