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अस्पताल प्रशासन की लापरवाही पर 5 लाख का जुर्माना, बिना इजाज़त ‘ब्रेन डेड’ को वेंटिलेटर पर रखा

नई दिल्लीः राजधानी दिल्ली में अस्पताल प्रशासन की शर्मनाक हर्कत सामने आई है, जिसके चलते दिल्ली के निजी अस्पताल पर उसकी लापरवाही के लिए जुर्माना लगाया गया है. मामला बत्रा हॉस्पिटल का है, जिस पर जुर्माना इसलिए लगा है क्योंकि उसने एक ब्रेन डेड लड़के को बिना उसके परिवार की अनुमति के वेंटिलेटर पर रखा. बता दें कि अप्रैल, 2016 में 14 वर्षीय प्रशांत को ‘बत्रा हॉस्पिटल मेडिकल रिसर्च सेंटर’ में भर्ती कराया गया था. उस वक्त लक्षणों से लग रहा था कि प्रशांत को टाइफॉइड है. इलाज के दौरान उसकी तबीयत और बिगड़ती चली गई और 1 महीने बाद उसे मृत घोषित कर दिया गया.

प्रशांत के परिवार का आरोप है कि वह अप्रैल में ही ब्रेन डेड हो गया था और हॉस्पिटल ने उन्हें इस बारे में कोई जानकारी भी नहीं दी. इन्हीं आरोपों की सुनवाई के बाद ‘दिल्ली स्टेट कन्ज्यूमर रिड्रेसल कमीशन’ (DSCRC) ने बत्रा हॉस्पिटल पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. कमीशन ने माना है कि हॉस्पिटल ने प्रशांत की स्थिति के बारे में उसके परिवार को नहीं बताया है.

कमीशन ने कहा कि प्रशांत का परिवार उसे वेंटिलेटर पर रखना नहीं चाहता था, इस बारे में उसके परिवार से कोई लिखित सहमति भी नहीं ली गई थी. परिवार ने बताया कि जब तक हॉस्पिटल को पैसे मिलते रहे उसने प्रशांत को वेंटिलेटर पर रखा. हॉस्पिटल का कहना है कि प्रशांत के परिवार ने शुरुआत में उसे वेंटिलेटर पर रखने के लिए सहमति नहीं दी थी, लेकिन जब एक वरिष्ठ कंसल्टेंट ने इस मामले में हस्तक्षेप किया तो वे सहमत हो गए थे.

इसके अलावा, कमीशन ने कहा कि लिखित सहमति के अभाव में मैं यह मानता हूं कि अस्पताल ने अपनी सेवा ठीक से नहीं दी है. प्रशांत के माता पिता का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन द्वारा ट्यूब को गलत तरीके से जोङा गया था और किसी सीनियर डॉक्टर ने उसे देखा तक नहीं. प्रशांत को इंसूलिन का भारी डोज दिया गया, जबकि उसे डायबिटीज़ से जुङि कोई समस्या नहीं थी.

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