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आज से दो दिवसीय हड़ताल पर बैंक कर्मचारी, अटक सकती है दिल्लीवालों की सैलेरी

सरकारी बैंकों के कर्मचारियों ने इंडियन बैंक एसोसिएशन (आईबीए) द्वारा वेतन में दो प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी के खिलाफ देश में सभी बैंकों में दो दिनों तक हड़ताल रहेगी. बता दें इस हड़ताल की वजह से सभी लोगों की सैलरी में देरी हो सकती हैं. बैंक के साथ एटीएम मशीन से भी पैसा निकालने में दिक्कत हो सकती है.

ऑनलाइन बैकिंग पर पड़ेगा असर

आजकल पैसे का लेन देन आसान हो गया है क्योंकि हम ऑनलाइन बैकिंग का इस्तेमाल करते है. लेकिन इस हड़ताल की वजह से नेटबैंकिंग, एनईएफटी, आरटीजीएस जैसी सेवाएं नहीं मिलेंगी. इसका सीधा सीधा असर पड़ेगा ऑनलाइन सुविधाओं पर. एसबीआइ, बैंक ऑफ बडौदा, पीएनबी, इलाहाबाद बैंक, यूको बैंक, यूनियन बैंक सहित पब्लिक व प्राइवेट सेक्टर के बैंक अधिकारी कर्मचारी यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के बैनर तले हड़ताल होगी.

हड़ताल का कारण

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) का बयान आया है कि पिछले पांच मई को बातचीत को हुई. जिसमें आईबीए ने सरकारी कर्मचारियों ने दो प्रतिशत वेतन बढ़ाने का प्रस्ताव रख दिया था. जिसे सिरे से खारिज कर दिया गया. इस हड़ताल से देश भर में अरबो खरबो रूपये का बाजार और कारोबार प्रभावित हो जायेगा.

पहले भी हुई 15 फीसदी वृद्धि

एआईबीईए के महासचिव सीएच वेंकटचलम ने कहा कि पिछली बार भी आईबीए ने 15 फीसदी वेतन की बढ़ोतरी की थी. बता दें सरकारी कर्मचारी अपनी उन बातों पर अड़े रहे है कि अधिकारियों की मांगो को ध्यान में रखकर स्केल 3 तक ही सीमित रहेगी.
यूएफबीयू ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कॉन्फेडरेशन (एआईबीओसी) ऑल इंडिया बैंक एंप्लॉइज एसोसिएशन (एआईबीईए) तथा नेशनल ऑर्गनाइजेशन ऑफ बैंक वर्कर्स (एनओबीडब्ल्यू) सहित नौ संगठनों का एक निकाय है.

दो दिनों की हड़ताल

भारत में बैंक की दो दिनों की हड़ताल अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ सकती है. यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन की एक आवाज पर करीब 10 लाख कर्मचारी एवं अधिकारी 30 और 31 मई को हड़ताल पर जा रहे हैं. यूनियन के सचिव कामरेड इंद्रपाल राठी ने बताया कि बैंक कर्मचारियों व अधिकारियों के वेतन वृद्धि जो 1 नवंबर 2017 से देय हैं.

आज आईबीए के 2 फीसदी वृद्धि को लेकर जो बैंक हड़ताल का प्रदर्शन हो रहा है वह शर्मनाक हैं. उनका कहना है बैंककर्मियों ने अपनी मेहनत व ईमानदारी का मजाक बना रखा है जहां एक बैंक कर्मचारी किसी दूरदराज क्षेत्रों में विकट परिस्थिति में रोज 12 घंटे काम करता हैं. वहीं एकतरफ बैंक की ऋण वसूली को लेकर कोई बड़ा कानून नहीं बनाया जा रहा है जिसकी वजह से कई डिफाल्टर बैंको को चूना लगा रहे है.

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