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हाईकोर्ट का फैसलाः 26 जुलाई से पहले दिल्ली में नहीं काटे जाएंगे पेङ

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में पेङों की कटाई का मुद्दा काफी दिनों से उठाया जा रहा है. दिल्ली में पेङों को बचाने के लिए दिल्लीवासियों ने चिपको आंदोलन की शुरुआत भी की थी. लेकिन, दक्षिणी दिल्ली में 16,500 पेड़ काटने के मामले में बुधवार को दिल्ली हाई कोर्ट में जस्टिस गीता मित्तल और जस्टिस हरि शंकर की बेंच के तहत सुनवाई हुई. यह सुनवाई तकरीबन आधे घंटे तक चली. हाई कोर्ट ने एनबीसीसी, DDA और अन्य विभागों को फटकार लगाते हुए सवाल किया कि एक तरफ देश के दो बड़े अस्पतालों AIIMS और सफदरजंग के बाहर मरीजों को पानी नहीं मुहैया करा पा रहे हैं और ठीक दोनों अस्पतालों के सामने री-डेवलपमेंट के नाम पर पेड़ों की कटाई की जा रही है. लिहाजा, अगर जरूरत पड़े तो इस पूरे प्रोजेक्ट पर रोक लगा देंगे.  फिलहाल, हाई कोर्ट ने पूरी दिल्ली में पेड़ काटने पर 26 जुलाई तक रोक लगा दी है. कोर्ट ने एनबीसी, DDA, केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार को प्रोजेक्ट और पेड़ काटने पर डिटेल में जवाब दायर करने का भी आदेश दिया है. हाई कोर्ट ने सभी एजेंसियों को फटकार लगाते हुए कहा कि 2 मंजिला बिल्डिंग को 8 मंजिला बिल्डिंग में तब्दील करना री- डेवलपमेंट नही होता. री-डेवलपमेंट को हम पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़कर देखते हैं.  इसके अलावा हाई कोर्ट ने दिल्ली में किसी भी डिपार्टमेंट को पेड़ कटाई की इजाजत देने से साफ इनकार किया है.

आपको बता दें कि इससे पहले नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने भी दिल्ली में पेड़ कटाई पर अगले आदेश तक के लिए रोक लगा दी है. NGT ने कहा इस मामले में यथास्थिति बनाये रखें. मामला हाई कोर्ट में है इसलिए हम कोई अंतरिम आदेश नहीं दे रहे. NGT में हुई सुनवाई में दिल्ली में पेड़ काटकर कॉलोनी के पुनर्विकास कर रही एजेंसी NBCC ने बताया कि उसने दिल्ली हाई कोर्ट में पहले ही अंडरटेकिंग दी है कि वो पेड़ नहीं काट रही है. जिसके जवाब में कोर्ट ने कहा कि यथास्थिति बनाये रखें यानी अगले आदेश तक पेड़ ना काटे जाएं. इस मामले में अगली सुनवाई 19 जुलाई को होगी.

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