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हर महिला के लिए प्रेरणा हैं प्रदेश की पहली महिला कमेंटेटर अल्का सिंह की कहानी

कोशिश करो तो ऐसी करो की आपको कोई पीछे छोड़ने वाला ना हो. कोशिश की पहले में कोई आलोचना करें तो कामयाबी के बाद तारीफों के पुल बांधने को मजबूर हो जाए. 19वीं सदी हो या फिर 21वीं सदी महिलाओं के लिए कामयाबी हमेशा एक संघर्ष भरी कहानी ही रही है, लेकिन पुरानी कहावत है कोशिश करके पीछे ना हटने वालों को हमेशा ही जीत मिली है. कुछ ऐसी ही प्रेरणा भरी कहानी है भारत की पहली महिला वुमन सेलेक्टर अल्का सिंह की.

जिन्होंने अपने हौंसलों से देश के उस हिस्स में जगह बनाई जिसके बारे में कल्पना कर पाना भी शायद मुश्किल था. स्कूल के दिनों से हॉकी, क्रिकेट जैसे खेलों में माहिर रही अल्का सिंह को पहला चांस कानपुर के एक कोच ने दिया. उल्टे हाथ से गेंदबाजी करने जब वह उतरती थीं तो हर कोई थोड़ी देर के लिए सोच में पड़ जाता था. स्टेट लेवल पर खेलने के बाद अल्का ने एयर इंडिया के लिए खेलना शुरू किया. रानी झांसी ट्रॉफी खेलने के बाद उनका ख्याब बड़े क्रिकेटर्स में शामिल होने का था, लेकिन इसी बीच उनकी मां का देहान्त हो गया. मां के देहान्त के बाद अल्का ने पहले खुद को संभाला, सरकारी नौकरी में जगह बनाई शादी की, एक बच्चे को जन्म दिया, पर क्रिकेट का सफर छूट गया. कुछ वक्त बाद अल्का ने एक स्पोर्ट्स चैनल के लिए कमेंट्री शुरू की.

उस वक्त ये काफी नया था कि कोई महिल कमेंट्री करें. पर उन्होंने इसे एक चैलेंज के तौर पर लिया और पहली महिला कमेंटेटर बनीं. 2006 में बीसीसीआई द्वारा महिला क्रिकेट अधिकृत किए जाने के बाद उन्हें महिला क्रिकेट सेलेक्टर बनाया गया. वर्तमान में अल्का यूपी से चयनित होने वाली 16 और 19 आयु वर्ग की टीम का सेलेक्शन करती हैं. साथ ही नेशनल लेवल पर क्रिकेटर्स को सेलेक्ट करती हैं. आज अल्का सिंह की सेलेक्ट की हुईं लड़िकयां नेशनल ही नहीं बल्कि इंटर नेशनल लेवल पर खेल रही हैं.

दिल्ली लेटेस्ट न्यूज से बातचीत में उन्होंने इस बात पर खुशी जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि मुझे इस बात की खुशी है कि मैं खुद देश के लिए ना खेल पाई, लेकिन आज उस लेवल पर पहुंच गई हूं, जहां पर मेरे द्वारा सेलेक्ट की गई लड़िकयां ना सिर्फ खेल रही हैं बल्कि देश का नाम वैश्विक स्तर पर रोशन कर रही हैं. वर्तमान में अल्का सिंह अपने पति और एक 9 साल की बेटी के साथ कानपुर में रह रही हैं. अपनी बेटी को क्रिकेटर बनाए जाने के सवाल पर उनका कहना है कि वो अपनी बेटी पर किसी तरह का दवाब नहीं बनाएंगी, वो जो करना चाहती हैं वो कर सकती है. दिल्ली लेटेस्ट न्यूज के पाठकों के लिए अल्का का कहना है कि आज लड़कियों के पास हर वो ताकत है जिससे वो खुद को सशक्त बना सकती है. खासकर सोशल मीडिया और जागरुकता के इस दौर में लड़कियों के मन में सिर्फ एक इच्छा शक्ति होनी चाहिए.

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