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एक प्यार का नगमा है…सुनते ही बन गया दिल्ली मेट्रो में सफर करने वालों का दिन

एक प्यार का नगमा है मौजों की रवानी है ज़िदंगी और कुछ भी नहीं तेरी मेरी कहानी है…कल रात मैं दिल्ली मेट्रो से सफर कर रहा था तो राजीव चौक मेट्रो स्टेशन पर एक 50- 55 वर्षीय आदमी बहुत ही सुरीली धुन में माउथ ऑर्गन बजा रहा था. उनके उस instrument से निकली धुन इतनी सुरीली थी कि पूरे दिन की थकान मिट गई. धीरे धीरे लोग उनके पास आकर एकत्रित होने लगे. हर कोई उनकी तारीफ कर रहा था.

लोगों की खुशी के लिए बजाते हैं

फिर मैं उनके पास गया तो उनके बारे में पूछा. मुनींद्र सागर…यहीं नाम बताया उन्होंने. मुनींद्र नोएडा सिटी सेंटर में ब्रिटिश स्कूल ऑफ लेंग्वेज में अंग्रेजी के टीचर हैं. उन्हें माउथ ऑग्रन बजाने का शौक शुरु से ही है. एक बार वो मेट्रो स्टेशन पर धीरे धीरे अना instrument बजा रहे थे. तभी सभी लोगों ने आकर उनकी काफी तारीफ की. तो उसी दिन ने उन्होंने सोच लिया कि अब वो ये instrument लोगों की खुशी के लिए बजाया करेंगे.

उन्होंने एक बहुत ही खूबसूरत बात कही कि जब मैं ये instrument जाता हूं तो लोगों तालियां बजाते हैं, आकर गले मिलते हैं तो जो ये खुशी हैं मैं वो कहीं नहीं खरीद सकता. मुनींदर ना तो पैसे के लिए बजाते हैं और न ही सबका ध्यान आकर्षित करने के लिए बल्कि वो बजाते हैं लोगों को खुशी देने के लिए.

मेट्रो मेलोडी मैन

मुनींद्र दिल्ली मेट्रो में काफी मशहूर है, और उन्हें मेट्रो मेलोडी मैन के नाम से जाना जाता है. उनका कहना है कि उन्होंने पहले ही अपनी पत्नी को कहा हुआ है कि जब वो संसार से विदा लें तो उनके साथ उनके इस instrument की भी विदाई कराई जाए. जब शुरु शुरु में मेलोडी मैन ने मेट्रो में बजाना शुरु किया तो मेट्रो की ओर से उनसे कहा गया कि वो इसे मेट्रो के अंदर नहीं बजा सकते तो आसपास के सारे लोग उनके समर्थन में आ गए कि उन्हें की तकलीफ नहीं है बल्कि वो खुद उनकी धुन सुनना चाहते हैं.

मुनींद्र ने भी कहा कि चाहे उन्हें जेल में डाल दिया जाए मगर फिर भी वो इस धुन को बजाएंगे. मुनींद्र से जब पूछा कि वो इतनी सुरीली और दिल को छू जाने वाली धुन कैसे बजा लेते हैं तो उन्होंने एक मुस्कुराहट के साथ बताया कि ये उनके दिल के भाव है और धुन के साथ बाहर आते हैं.

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