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डीपीसीसी का आदेश, दिल्ली में केवल 9 तरह के फ्यूल का होगा उपयोग

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में डीपीसीसी (दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति)  ने लंबे इंतजार के बाद आखिरकार ईधनों की अप्रूव्ड लिस्ट की सूचना जारी कर दीय है. यह कदम दिल्ली में बढ़ रहे प्रदूषण के स्तर को देखते हुए उठाया गया है. बता दें कि, अप्रूव्ड फ्यूल की लिस्ट जारी होने का सबसे बड़ा असर इंडस्ट्रियल सेक्टर पर पड़ेगा. दिल्ली में इस समय इंडस्ट्रियल सेक्टर कई तरह के डर्टी फ्यूल का इस्तेमाल कर रहा है, जिसकी वजह से दिल्ली में प्रदूषण की समस्या दिन पर दिन बढ़ती ही जा रही है. ईपीसीए पहले ही साफ कर चुका है कि इंडस्ट्री पर कार्रवाई बढ़ने के साथ अब दिल्ली के नॉन-कन्फर्मिंग एरिया (रेजिडेंशल) में शिफ्ट हो रही हैं. ऐसे क्षेत्रों में चल रही अवैध इंडस्ट्री पर डीपीसीसी के पास कार्रवाई का अधिकार नहीं था, लेकिन अब अगर वे अवैध फ्यूल का इस्तेमाल करेंगी तो डीपीसीसी इन पर कार्रवाई कर सकती है.

ईपीसीए के चेयरमैन डॉ. भूरे लाल के अनुसार, इंडस्ट्रीज को 90 दिन का समय दिया गया है जो सितंबर के मध्य तक खत्म हो जाएगा. दिल्ली में प्रदूषण की समस्या अक्टूबर से बढ़ती है. ऐसे में फ्यूल अप्रूव्ड होने से इंडस्ट्री पर कार्रवाई की प्रक्रिया आसान हो जाएगी. इस नोटिफिकेशन के बाद ओपन बर्निंग भी कम होगी. इसमें नरेला, बवाना आदि के आसपास बड़ी संख्या में इंडस्ट्री अपने वेस्ट को ठिकाने लगाने के लिए ओपन बर्निंग करते हैं.

किन-किन ईंधनों का हो सकेगा प्रयोग

– पेट्रोल (बी एस-6, 10पीपीएम सल्फर के साथ)

– डीजल (बीएस-6, 10 पीपीएम सल्फर के साथ)

– एलपीजी

– सीएनजी

– विमानन टरबाइन ईंधन

– लकड़ी का प्रयोग तीन जगहों पर होने की इजाज़त है. इसके अंतर्गत श्मशान और अन्य धार्मिक काम शामिल हैं. इसके अलावा होटल, रेस्तरां, बैंक्विट हॉल, भोजनालय के तंदूर और भूनने के लिए लकड़ी के कोयले का इस्तेमाल हो सकता है. लेकिन इसका इस्तेमाल वही लोग कर सकेंगे, जिनके पास कंट्रोल सिस्टम यानी चैनलाइजेशन होगा. इसके अलावा कपड़ों पर प्रेस करने के लिए लकड़ी के कोयले का इस्तेमाल हो सकेगा.

– बायो गैस

– कचरे से निकाले गए ईंधन का प्रयोग वेस्ट टु एनर्जी प्लांट में हो सकेगा

– कोई भी ऐसा स्वच्छ ईंधन जिसे दिल्ली में दिल्ली सरकार या भारत सरकार ने नोटिफाई किया हो

इन नौ तरह के फ्यूल के अलावा थर्मल पावर प्लांट में ऐसे कोयले का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसमें सल्फर की मात्रा 0.4 पर्सेंट से कम हो.

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