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स्ट्रोक की चपेट में युवा वर्ग, 90 दिनों में कर सकते हैं इलाज

नई दिल्लीः देश में युवाओं के लिए दिन पर दिन समस्या बढ़ती जा रही है. आजकल खतरनाक तरीके से बढ़ रहे स्ट्रोक के चपेट में सबसे ज्यादा युवा वर्ग आ रहे हैं. स्ट्रोक किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है. एक अनुमान के अनुसार, भारत में हर साल 18 लाख से ज्यादा लोग स्ट्रोक के शिकार होते हैं.

विशेषज्ञों के मुताबिक, इनमें से लगभग 15 फीसद मामले 30 से 40 उम्र या इससे ऊपर के लोगों को प्रभावित करते हैं. स्ट्रोक पीङित व्यक्ति का इलाज कर उसे 90 दिनों के अन्दर यथासंभव उसकी सामान्य दिनचर्या लायक बनाना व उसे फिर से उसके कामकाज से जोङ देने से ही बेहतर नतीजे प्राप्त होते हैं. वर्ना धीरे-धीरे दिमागी और शारीरिक नुकसान स्थाई रूप ले लेता है.

स्ट्रोक या सेरेब्रो वास्कुलर एक्सीडेंट (सीवीए) के परिणामस्वरूप दिमाग में अचानक खून की कमी या मस्तिष्क के भीतर रक्तस्राव होता है, जिसके कारण शरीर की न्यूरोलॉजिकल गतिविधि खराब होने लगती है. मोटापे, धूम्रपान, उच्च रक्तचाप, शराब, मधुमेह और पारिवारिक इतिहास आदि स्ट्रोक की प्रमुख वजह बनते हैं.

स्ट्रोक की पहचान-

चेहरा टेढ़ा होना बोलने में दिक्कत, पहचान में परेशानी और टाइम टु इमरजेंसी, जो कि दवा उपचार के लिए पहले 4.5 घंटे और ब्रेन वेसल इंटरवेंशन के लिए शुरुआती 24 घंटे हैं. यानी स्ट्रोक के 4.5 घंटे के अंदर दवा से इलाज शुरू कर देने चाहिए.

फाइल फोटो

विशेषज्ञों के लिए सुझाव-

90 फीसद स्ट्रोक 10 जोखिम कारकों से जुङे होते हैं, जिन्हें बदला जा सकता है. इसके लिए उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करें, हफ्ते में पांच बार हल्का व्यायाम करें, फल और सब्जियां खाएं और नमक कम लें. इसके साथ ही व्यक्ति को कोलेस्ट्रॉल कम करना भी ज़रूरी है. स्वस्थ बीएमआइ या कमर से कूल्हे का अनुपात बनाएं रखें. धूम्रपान बंद करें और इसके धुएं से भी बचें और शराब का सेवन कम करें.

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