Delhi Top News Politics

दिल्ली को मुख्यमंत्री की मर्ज़ी के बिना, गृह मत्रालय ने दिया नया चीफ सेक्रेट्री

नई दिल्ली :मुख्यमंत्री केजरीवाल शुरू से ही केंद्र पर यह आरोप लगाते रहे है कि भाजपा सरकार उनके काम में रुकावट डालती है. हमको सही से काम करने का मौका नहीं दिया जाता. इसी मामले में अब मुख्यमंत्री के चीफ सेक्रेट्री की नियुक्ति मामला भी शामिल हो गया है. विजय कुमार देव को राष्ट्रीय राजधानी का मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है.ऐसा लगातार तीसरी बार है जब मुख्यमंत्री से मशवरा किये बिना ही मुख्य सचिव की नियुक्ति की गयी है.जबकि वर्ष 2016 में जारी ग्रह मंत्रालय की एक केडर नीति के अनुसार यह मशवरा ज़रूरी है. इस कैडर में कहा गया है कि मुख्य सचिव और प्रशासक की नियुक्ति के लिए के लिए गृह मंत्रालय मुख्यमंत्री के मशवरे से नियुक्ति को मंज़ूरी दे सकता है. बता दें कि मई 2015 में गृह मंत्रालय ने अरविन्द केजरीवाल सरकार से सेवाओं से सम्बंधित नियंत्रण ले लिया था.

ठीक इसके एक साल बाद नवंबर 2016 को पॉलिसी लागू की गई थी.पालिसी में लिखा हुआ है कि मुख्यमंत्री से मिली प्रतिकिर्या पर विचार करने के बाद गृह मंत्रालय मुख्य सचिव, प्रशासक, पुलिस महानिदेशक की पोस्टिंग के लिए आर्डर दे सकता है.साथ ही कहा गया है कि अगर इस मामले में 15 दिन के भीतर कोई प्रतिकिर्या नहीं मिलती है तो गृह मंत्रालय अपने विवेक से निर्णय ले सकता है.इसके आलावा अधिकारीयों के ट्रांसफर और पोस्टिंग पर फैसला एजीएमयूटी कैडर की जॉइंट कैडर अथॉरिटी द्वारा किया जायेगा.

इस मामले में जब गृह मंत्रालय के अधिकारी से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि दिल्ली में ट्रांजेक्शन ऑफ बिज़नेस रूल्स(टीबीआर) की प्राथमिकता रहती है.यह मुख्यमंत्री के परामर्श करने की आवश्यकता पर रोक लगाती है.टीबीआर की धारा 55 के खंड अनुसार मुख्य सचिव के चयन और पोस्टिंग के लिए सिर्फ एलजी की सहमति की ज़रूरत होगी.

लेकिन दो मुख्य सचिव जो कि इससे पहली शिला दीक्षित सरकार में अपनी सेवाएं दे चुके है.उन्होंने इसमामले में मीडिया को बताया कि उप-राज्यपाल की मंजूरी जरुरी थी लेकिन मुख्यमंत्री का भी हमेशा मशवरा लिया गया है. अरविन्द केजरीवाल की सरकार में नियुक्त किए गए पहले मुख्य सचिव के के शर्मा उन तीन अधिकारियों में एक थे जिनके नाम आम आदमी पार्टी की सरकार ने भेजे थे. मुख्यमंत्री दफ्तर की तरफ से कहा गया कि हम एमएम कुट्टी, अंशु प्रकाश और अब विजय देव की नियुक्ति में शामिल नहीं है. ऐसे विवाद पैदा करके केंद्र सरकार राज्य सरकार को विकास कार्यों से भटकना चाहती है. लेकिन हम जनता के लिए प्रतिबद्ध है कि उन तक विकास की सभी सेवाएं सही समय तक पहुचाएं.

आपकी राय

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *